Life Lesson

Analyser/Observer

In order of acquiring experiences certain we get, certain left and certain we lost.
©Ashok_Bamniya


मेरा घोडा (Positive Ego)

 जिन्दगी की तेज रपट पर

सरपट दौड़ा मेरा घोडा, मेरा घोडा। 

कठिनाइयों की ऊँची चट्टान पर

लंबा कूदा मेरा घोडा , मेरा घोडा। 

संकरे, चौडे

उत्तल, अवतल

दर्द नाम का बन विनाशक

हाँफता दौडा, हाँफता दौडा

मेरा घोडा, मेरा घोडा। 

लू- सी तपती, 

बर्फ सी जमती, 

पाक जमीं पर, 

लिये पाक इरादे, 

खूब इठलाता, 

खूब हुंकारता, 

 बेलगाम मतलबी, 

हवा मे उडता, 

बादलों मे खेलता, 

दौडता जाता, दौडता जाता, 

मेरा घोडा, मेरा घोडा। 

जिन्दगी की तेज रपट पर

सरपट दौड़ा मेरा घोडा, मेरा घोडा। 

©Ashok_Bamniya

गलतियाँ

Analyser/Observer

गलतियाँ

हजार गलतियो से सीखा हूँ, 
उलझा हूँ, तभी सुलझा हूँ। 



©Ashok_Bamniya

Analyser/Observer

एक सच ऐसा भी

Analyser/Observer


जब मैं खुद को देखता हूँ, 
तो मुझे तुम दिखती हो, 
क्या ये वक़्त का इशारा है, 
या ये मेरी ही नजरो का धोका है। 

बांध रखा है शायद मैंने, 
अपने ही अंतर मन को
तुम्हारे ध्यान से, 
सोच से मेरे परे हो नही रही तुम
सोच का मेरा दायरा भी, 
तुम तक ही सिमटा जा रहा। 

सच कहु तुमसे तो , 
जितनी भी रूहानी बाते है, 
मैं तुमसे ही करना चाहता हूँ। 

सँग तुम्हारे ही चलना चाहता हूँ, 
सँग तुम्हारे ही जीना चाहता हूँ। 
हर स्वपन मे मेरे अपनी इस,
परिकल्पना के साकार होने की तमन्ना लिये, 
स्वपनो की चादर ओढे सोता हूँ।

इस इंतजार मे की शायद वो दिन आयेगा, 
जब तुम अपने चेहरे की किरणो से, 
मुझे मेरे स्वपनो से जगाओगी। 
©Ashok_Bamniya

बेखबर जज्बाती

वो रातों को जगता है शायद उसकी नींदों को किसी ने चुरा लिया
बेबस नहीं
खुश है अब
शायद अब
अपनो ने उसको अपना लिया
बेख्याली मे था लिया फ़ैसला
ज़िन्दगी थी उससे रूठ गयी
साथ मिला क्या तेरा कुछ पल
उसकी तो हँसी ही छुट् गयी
लफ्ज अब शिकायत नहीं करते
डरते है शर्मिंदा है
क्या सामना करे गैरो का
अपने ही कातिल जिन्दा है
रूह तक जहर उतर चुका
सांसे भी रक्त से सनी हुई
आबाद सियासत पहले थी
अब अपनी ही लकड़ी जली हुई
दिन रूठे
मनाने का समय नहीं
अपनो को जताने का समय नहीं
बेखबर जज्बाती
अब मुस्कुराने का समय नहीं।
#बेखबर_जज्बाती
©Ashok_Bamniya


किरदार



जिन्दगी एक किरदार ही तो है,
वक़्त आने दो ये भी बदलेगी।
अभी तो जमीन पर
कोई हलचल नही दिख रही
भुचाल आने दो
ये भी धँसेगी ।
उम्मीदों की पोट ली
जो बाँध रखी है
दिमाग मे ।
खोल दो
कि ये फिर ना खुलेगी ।
शिकायतें जो भी है
अब बता भी दो ।
फिर करोगे किससे
रहनुमा तो अब रहे नही ।
हँसी बाँट रहे हो ना
जो लोगो मे ।
तुम्हारे बहुत करीब का
तालाब तुम्हे दिखाई नही देता ।
ठीक से देखो
अब दीवारे तालाब की
कमजोर
बहुत कमजोर
हो गयी है ।
समय है अब भी
संभाल लो इसको
कि फिर ये तुमसे ना संभलेगी ।
जिन्दगी एक किरदार ही तो है,
वक़्त आने दो ये भी बदलेगी।
©Ashok_Bamniya

ख्याल

तुम मुझसे नही आइने से पूछो अपनी खुबसुरती के बारे मे, मेरा तो बस यही ख्याल है कि तुम्हे देखने के बाद मेरा ओर कोई ख्याल ना रहा।


उलझने

कहा तक संभाले अपने आप को, उलझने जिन्दगी की है जो कि खत्म नही होती। ©Ashok_Bamniya



ईमान

डोला डोला डोला
ईमान डोला
आज फिर एक सडक का लडका
टावर पर चढ कर बोला
डोला डोला डोला
ईमान डोला
इसका उसका
किसका किसका
ईमान डोला
वादे सारे मर गये
लुटी लंका अपने घर गये
बिन पानी ही तर गये
डोला डोला
ईमान डोला
खुद बन बैठा मगर
मछली हमको बना दिया
तालाब था सारा भरा
अकेला सब पचा दिया
डोला डोला
ईमान डोला
अब फिर कोई नया देवता बन आयेगा
हमको मीठी चाय पिलायेगा
हमारे ही घर खाना वो खायेगा
हमसे अपने बर्तन साफ करवायेगा
अगर अब भी उसको ना समझे तो
सारा का सारा घर वो खा जायेगा
डोला डोला
ईमान डोला
इसका उसका
किसका किसका
ईमान डोला
देखो उसको
अब तो कुछ सीख लो
ऐसा ना करो
कि अपनी आंखे भींच लो
लालच लालच का
अब नाम ना हो
शहर अब अपने कर्मो से ओर
बदनाम ना हो
पहले खुद को
तो मे शुद्ध करू
ज्यादा नही पर
थोडा सा तो प्रबुद्ध करु
डोला डोला
ईमान डोला

@Ashok Bamniya

याद

कब तलक तुम मुझे याद करोगे -2
रोओगे हजार बार याद मे मेरी
क्या उसके बाद भी मुझे याद करोगे
कब तलक तुम मुझे याद करोगे|

किताबे मेरी मेज पर जो थी पडी
चादर मेरी जिसपर सल्वटे थी सजी
क्या उनसे लिपटकर
याद मुझे बार-2 करोगे
कब तलक तुम मुझे याद करोगे |

फूल जो आँगन मे खिला
खडा-2 मुरझा गया
पानी मिला नही
माटी मे समा गया
मन के द्वार खोले कि
भेंट उनसे हो गयी
खिडकी से तेज किरण
आँखो पर पड रही
तेज इतना हुआ की
अँधेरा अब दिख रहा
नजर जहाँ तक गयी देखा
यहाँ हर कोई बिक रहा |-2

आखरी बात

Analyser/Observer

गम नही मुझे इस बात का भी कि मै तुझे खो दूँगा |
इससे ज्यादा ओर क्या होगा ,मै थोडा ओर रो दूँगा |
© Ashok Bamniya


आशकी

Analyser/Observer

कही निगाहे मेरी 
तुम्हे शर्मिन्दा ना कर दे 
तुम्हारे चेहरे पर 
हजारो पहरे है |

तुम्हारे चेहरे से 
जो सुकून बरसता है 
हम तो आज भी 
उसी के लिये 
इस कोने मे ठहरे है |

समझो 
अगर निगाहे तुम्हारी 
पकड ले कही मुझको 
अपने चेहरे पर 
मेरी पहचान आने ना देना |

लब जो अगर थरथरा उठे 
कही जल्दी मे 
मेरा नाम ना लेना |

मेरी अब वो 
हस्ती ना रही 
कि सम्भाल पाऊ 
तुम्हारे मोतियो को |

खुश हु , मेरे बाद भी 
तुम्हारी मुस्कान जिन्दा है |

धागे जो तुम्हारे 
उलझ गये है मुझसे 
उन्हे यूँही उलझा छोड जाओ |

एक गाँठ अब नयी बाँधी है 
तो अब इसे सिद्दत से निभाओ |

©Ashok Bamniya


छलावा प्यार का

Analyser/Observer

ऐ मेरी वफा ए मोह्ब्बत 
तु मुझे अँधेरे मे बुलाती क्युँ है 
यकीन मैने तेरा किया है 
तु उजाले से घबराती क्युँ है  |

तुझसे वफा निभाने को 
ना-जाने  कौन-कौनसी बाते 
हर मोड को होती हुई 
मेरे घर को पहुँची 
क्या अब भी कुछ बाकी रह गया 
तु मुझे चुपके से बुलाती क्युँ है | 

यकीन कर लू ना तुझ पर 
एक यही सच मुझ पर भारी है 
समझ से मेरे परे है 
अँधेरे मे मिलना ही तेरी लाचारी क्युँ है |

कई सवाल खडे थे राह मे 
सबको अनसुना छोड दिया 
सँकेत कई हुए शक के 
मैने सबसे मुख अपना मोड लिया 
कई चेहरे सवालो के हताश हुए 
लजाते उनको छोड दिया 
केवल तेरे एक बुलावे पर 
मैने सपनो को अपने मोड  लिया |

अब भी स्थिर नही अगर 
ये अल्फाज वफा के 
तो क्या मेरा हश्र होगा 
सवाल भी तबाह हुए अगर 
इससे बुरा क्या हश्र होगा | 



सब ठीक तो है ना

Analyser/Observer

अब तो बस 
जी चाहता है  
कोई अपना  
पूछ ले 
सब ठीक तो है ना |
और मै जोर से
रो दू 
पिघला दू 
उन आँसुओ को 
जो हर्दय-तल मे 
जम गये है | 
जो आँखो मे 
दिखायी नही देते |

व्यर्थ के भावो ने 
जो पाश मुझ पर डाला है 
एक-एक  कर उसके सारे बँधन मै खोलू 
जुबा जो अब तक 
प्रकट कर रही थी किसी ओर को 
उससे अब स्वयं को बोलु | 

अब तो बस 
जी चाहता है 
कोई अपना  
पूछ ले 
सब ठीक तो है ना | 

©Ashok Bamniya


तनाव

Analyser/Observer

जब हम अकेले होते है 
अँधेरे कमरो मे 
अकसर रो जाते है |

मन कि कुन्ठा 
बहा अश्रुओ मे 
चैन का बनाकर बिस्तर 
दर्द की चादर ओढकर 
सो जाते है |

आँखे मुंदी कि  कोई  आवाज 
पास हमारे आती है 
चेहरा अभी-भी सुखा नही है 
कि वही बाते फिर से हमे सताती है 
लुटा आये हम अपने ही हाथो 
अपने जज्बातो की जमीन को 

हे धर स्थिर 
चित्त अब शरीर छोड चला 
मन के भाव जो भी थे | 
एक मैल उनमे घुल गया 
हर तरफ स्याह फैला 
तु कौन था , किधर गया | 

घाव ये गहरे 
भाव अब मुख पर आते नही 
लाज़िम है अब तो 
हम किसी से कुछ कह पाते नही |

साँसे भी अपनी 
अब बदबूदार हुयी 
खुद ही , खुद से 
खुद की ये गुनहगार हुयी |
©Ashok Bamniya

Audio file तनाव
https://youtu.be/vQ7gQwnU3jk

Tanaav



यकीन

Analyser/Observer


यकीन है नही 
या यकीन हो रहा 
जुबान चुप हुयी 
मै खुद मे खो रहा 
बात कुछ नही 
पर बाते हो रही 
सुनाई दे रहा 
पर मै कुछ ना कह रहा 
वफा खत्म हुयी 
अब तुम भी मौन हो 
मै मुस्कुरा उठा 
जवाब मै भी ना दे रहा 
शिकायत मुझसे थी 
तो अब कह भी दो 
छुपाने के मायने भी 
अब खत्म हो चुके |

©Ashok_Bamniya 


AUDIO LINKhttps://youtu.be/o-QOsCy9Xhw
https://youtu.be/o-QOsCy9Xhw

#HNY नया साल

Analyser/Observer

कल की रात मे भी था 
आज का प्यार 
एक चादर ओढे कालिमा भी 
कर रही थी सुबह का इन्तजार 
महसूस कर पा रहे होंगे आप भी 
जज्बातो मे नया वेग 
सर्द हवाओ के झोंके भी 
देख रहे होंगे आपका तेज 
आज सुबह आंख को मेरी भी 
चिडियो की आवाज ने खोला 
दिल तक मानो कोई तरंग ऐसे पहुँची 
जेसे किसी ने मन मे मिठास को घोला 
पल-पल मिलकर बनते हे दिन 
और दिनो मे पलती हमारी उम्मीदे 
और उम्मीदो मे ढूँढते हम 
अपने भविष्य का उजियारा 
उजियारे की खोज तो सतत होनी भी चाहिये 
हमे निरंतर प्रयास को अपने प्रबल करना भी होगा 
पर प्रशन अब भी शायद मन मे कोई हे दबा 
क्या मै आज मे खुश नही हुँ 
हुँ तो अच्छा है 
नही हुँ तो होना होगा 
जीवन बनता हे प्रेम से 
और प्रेम ही फैलाता रोशनी 
तो खुल कर प्यार फैलाओ यारो 
गिले - शिकवे मिटाओ यारो 
अपनो से जुडाव बढाओ यारो 
कुछ नये अपने बनाओ यारो 
दिल से नया साल मनाओ यारो |

#नये_साल_की_सुभकामनाये

#नव_वर्ष_आपके_जीवन_मे_खुशिया_लेकर_आये

#Happy_New_Year

#HNY 

©AshokBamniya

Happy New Year



नौकरी

Analyser/Observer

धदक रहे अँगारे दिल मे
मोहब्ब्त मे तेरी 
ये हाल तो मेरा ना होना था |

जब पहली बार देखा था तुझे 
चमकीले परिधानो मे लिपटी 
तु मुझे मेरे ख्वाबो कि परी सी नजर आयी |

तुझे देख सोच जो मेरी 
अब तलक ठहरी थी 
तेरी ओर से बहती हवा का 
सम्पर्क पा तेरी ओर ही चल पडी |

तुम्हारे उस आकर्षक अहसास ने 
हजारो सपने मेरी आँखो मे पाल लिये |
मै तुम्हारी धुन मे खोकर बेसुध सा हो गया  |

मैने कि जो तुमसे मोहब्ब्त 
पूरी सिद्दत से निभायी भी |
तुमसे मिलने को 
तुम्हारे साथ जीवन बसर करने को
हर तरकिब अपनायी भी |

पता नही मुझे 
फिर कहा कमी रह गयी |
अपना सब कुछ तो मै लुटा बैठा 
फिर भी तुमसे दूरी है |
ऐसी भी क्या तुम्हारी मजबूरी है |

चाहत हो तुम मेरी 
मेरी ओर चली आओ 
समेट लेना चाहता हू तुम्हे बाँहो मे अपनी 
तुम मुझे अपनी ओर तो बुलाओ |

मै कब का मर चुका

Analyser/Observer

जिन्दगी जब आपकी तमाम खुशीयाँ छिनने पर आ जाये 
जब आपकी आँखे आँसुओ की जगह लहू उगलने लगे 
सुविचार और कुविचार की जंग दिमाग मे चलने लगे 
सद्भावनाये आहत हो अन्दर ही मरने लगे 
होंठो पर एक प्रशन छोडती मुस्कान आने लगे 
भरी जवानी मे चेहरे पर बुढापा छाने लगे 
आप दुआ मे खुद की मौत माँगो 
ओर लबो पर आपके मुस्कान आने लगे 
जब अपने ही चेहरे छुपाने लगे 
खुद को नकाब ओढाने लगे 
जब गैर पर्दा हटाने लगे 
सूरज की चमक आपको दिखाने लगे 
वो परिंदे नादान नही जिनके पंख उग आने लगे 
नादान तो आप है जो उनको ऊँची उडान का सपना दिखाने लगे 
उनसे अब भी क्या आस लगा ये बैठे हो 
घाव अभी तक भरे नही है उनके दिये 
झांक कर देख लो अपनी ही जेब मे 
मरहम जो अब तक छुपाये बैठे हो 
मौत मासूम है 
तुम पर तरस खा जायेगी 
क्यो अब बुला रहे हो उसको 
वो बुलाने से भी ना आयेगी 
हे जिन्दगी जानलेवा 
पल पल तुम्हे खायेगी 
इतना आसान नही है इससे बच पाना 
ज़िल्ल्त क्या होती है 
इसका अहसास तुम्हे करायेगी |

हे राम



दाता तु ही 
तु ही पालनहारा |

हे राम हे राम हे राम हे राम

विपत्ति मे मैने तुझको पुकारा |

हे राम हे राम हे राम हे राम 

तुने ही सारा संसार रचया 
तेरे ही बल से चलती ये काया |

हे राम हे राम हे राम हे राम 

भारीत मन पर कर उपकार 
संकट हर प्रभु दे उपहार 
जग मे प्रभु तेरा नाम ही सच्चा 
तु ही नियामक सबसे अच्छा |

हे राम हे राम हे राम हे राम 

जब भी मैने तुझको है पुकारा 
तु ही बना प्रभु मेरा सहारा |

हे राम हे राम हे राम हे राम 

वचन मेरे प्रभु तुने ही पार लगाये 
दुख की घडी बीती 
सुख के दिन आये 
किया ना प्रभु तुने
कभी मुझसे किनारा 
तुने ही बनाया प्रभु भाग्य हमारा |

हे राम हे राम हे राम हे राम |

विरक्ति

Analyser/Observer

कर गयी तुम उर को मेरे रिक्त
मन हो उठा मेरा अब विरक्त
होंठो की लाली भी छूट गयी
जब से हर्दयप्रिया तुम रुठ गयी |

अरमान अहसासो के पल भर मे ही तोड गयी
आधे ही सफर मे मुझे अकेला छोड गयी |

कसमे वादे सबको बेसहारा छोड गयी 
महबूबा मेरी तुम मुझसे ही मुँह मोड गयी |

मन अब तुम्हारे अहसास से दुख पाता है 
नींद मे तुम्हारा चेहरा भी डराता है |

अबोध अपना आपा अब खोता है 
कही भाग जाने को दिल अब ये होता है |

अपनायी तुमने कैसी ये सख्ती 
तन्हा अकेला छोड चली तुम 
रह गयी मुझ संग 
बस अब विरक्ति |

बाँधी तुमने अपनी आंखो पर तिरस्कार की पट्टी 
मुझ मे विचरती अब तेरी विरक्ति |

नासमझ

मै खुद को समझता था 
समझदार बडा 

हर किसी के विरोध मे 
मै हो जाता था खडा 

बातो को अपनी 
सत्य ही मै जानता 
बाकी कोई कुछ भी बोले 
सब को गलत ही मानता |

अपनी जीत से मै 
हर किसी पर हावी था 
सच्चे लोगो का बयान भी 
मुझ पर अप्रभावी था | 

बोली मे अपनी 
धौंस मै रखता था 
आँखो मै अपनी 
रोस मै रखता था |

सकल काम मेरे 
कोई ओर ही बनाता था 
बात खुद पर आये तो 
आक्रोश मै रखता था |

किसी ओर का दिया 
खा रहा था 
दाँतो तले ऊँगुली 
दबा रहा था |

#नासमझ खुद के 
गीत गा रहा था |

#नासमझ खुद ही पर 
मुस्कुरा रहा था |

#नासमझ अकेला ही 
चला जा रहा था |

©Ashok Bamniya

सेठजी-एक मीठा ठग

ईट , पत्थर ,रेत ,सीमेंट लाया 
इन्हे मिलाकर किला बनाया 
दीवारे रंगो से सँजायी 
इन्हे देख लोगो कि आँखे चौंधियायी |

रूप्या पैसा इतना दिखाया 
लोगो के बीच नाम कमाया 
लोग करने लगे हमरी बडाई 
हमहु बन गये सेठजी भाई |

लाल टीका माथे पर लगाया 
मुँह मे मीठा पान दबाया 
गुड की घर से कर दी  विदाई 
बाजार से शक्कर कि बोरी उठवायी |

मावा खुद ही हम खावे भाई 
जग मे बाँटे खूब झुटाई |

गरीब संग फोटो खिचवाये 
तब्हू ना हम सेल्फी किंग कहलवाये 
दिखावे का हाथ बढावे भाई 
पीठ पर लट्ठ चलावे भाई |

माल खुद ही हम दबावे भाई 
हमहु बन गये सेठजी भाई |

कुछ पुरानी बाते

#01 
ऐ मेरी आरजू-ए-दिल 
तुझे याद कर 
मै बहुत रोया |

#02
अब सूख गये
आँखो के आँसू 
अब दिल भी 
थोडा बरबाद होने चला है |

#03
इक़्त्फाक आइने बदल देता है 
चेहरा देखने के |

#04
हिम्मत तो देखो मेरी 
मैने अपना सिर उठा लिया | 

#05
ऐ प्यार तेरे इरादे 
मुझे पाक तो नही लगते |

#06
बेपरवाह मोह्ब्बत 
रोज तेरे आयाम नये है | 

#07
कोई तो मेरी चाहत को मुस्कान दे जाओ 
कि वो उखडी-2 अच्छी नही लगती | 

#08
वफा गुमनाम अँधेरो की 
मेरे दर पर आहट तो कर जा कभी-2 |

ये कैसा भाईचारा

रोज चीखते हो 
कोई कुछ नही कर रहा यहा 
जरा ठहरो 
खुद ही से पूछो 
तुमने अब तक ऐसा क्या किया |

तुमने अपने भतीजे को नौकरी लगवाया 
अपनी ही फैक्टरी मे उसको काम दिलवाया 
किसी और का टिकट कटवाया 
तब जाकर कही उसका नम्बर आया |

काबिल ना देखा तुमने 
तुमने देखा तुम्हारा वफादार 
जो भरे तुम्हारी 
हुँकार मे हुँकार |

चाचा के दम पर 
आज देखो छोरा ऊँचल रहा 
गली गली 
हर गली मे वो पसर रहा |

रो तो वो रहा है 
जिसके मुँह की तुमने खायी 
क्या करे खुदा भी 
तुमने उसकी ऐसी किस्मत बनायी |

बँटवारे का जहर 
तुम ही घोल रहे हो 
अब चीख चीखकर व्यथा अपनी 
तुम कैसे बोल रहे हो |

एक तुम्हारा सगा 
दूसरे को तुमने पराया कर दिया 
लालच मे अपने तुमने 
ये कैसा भाईचारा कर दिया |

बेबस तुम्हारे कर्मो से 
अब देश हो रहा है 
बडा सुनहरा था जिसका सपना 
आज वो खो रहा है |

©Ashok Bamniya


समझ

दिन धुआ हो गये 
राते भी काली है 
उम्मीदे मेरे घर को चली आयी 
पर मेरी जेब तो खाली है |

माँगकर सब तरफ देख लिया 
सबकी आंखे एक सवाली है 
क्या नही था तेरे पास 
जो तेरी जेब आज खाली है |

समर्थन सुख मे सब गवाया 
खुद ही लिखा 
खुद ही मिटाया |

बहकावे ने आज से बेहतर 
कल को बताया
वो हुए मालामाल 
मै खाली हाथ घर को आया |

बात अब करता हु 
जब गले तक आयी हे 
बहकावे ने अपनी लंका डुबायी है |

पर्दे पर जो दिख रहा 
तुम उसे ना मानना 
जो अन्दर से सच्चा हो 
उसे तुम जानना |

©Ashok Bamniya

बदलाव

ये लाल कैसे हो गया 
गुलाल तो डाला नही 
गुलाल कैसे हो गया 

आहट कोई हुई नही 
तुम दर से मेरे कब गये 
प्यार तो बढा नही 
मुस्किले हुई खडी
मुस्किले हुई खडी |

माना दिल मे तेरे 
मोह्ब्बत का आगाज ना था 
मैने भी तुमसे कभी 
माँगा ताज ना था |

किले खुशहाली के 
हवाओ से ढह गये 
आयी जो बरसात तो 
पहाड भी बह गये 
पहाड भी बह गये |

सूरते जनाब से 
हाल हमको दिख गया 
आइने सा साफ रंग 
लाल अब से हो गया |

#पुकार_दिल_की

खैर कोई बात नही जो साथ तेरा छुट गया धागा वफाओ का था जो कुछ बातो से ही टूट गया कल तक जो मेरा अपना था आज मुझसे ही रुठ गया खैर कोई बात नही जो तेरा साथ छूट गया |मोहब्बत मे तेरी तेरा इंतजार करूँगा अकेले ही सही तेरी याद मे मै ठंडी आह भरुंगा चाहत को अपनी फिर से पाने की खुदा से दुआ करूँगा |तन्हा अकेले बे-मन चलूँगा तडप को अपनी सीने मे दबा मुस्कुराकर चलूँगा ज़ज़्बात अपने दबा कर चलूँगा कोई पूछेगा दर्द मेरा उसकादिल बहला कर चलूँगा |तुम लौट आओगी इक दिन खुद मे मै ज़िद ये भरुन्गा किसी और का ना बनूँगा |तेरा ही हु मै तेराही रहूँगा |#पुकार_दिल_की ©Ashok Bamniya

दिवाली रा राम - राम

दिवाली रा राम - राम 
थे करजो जग मे अच्छा काम 
वेजो जग मे थारो नाम 
सुख - समद्धि थाके घर आजो 
बालका संग थे खिल - खिलाजो 
बुड्ढो रे आंखा रा तारा बन जाजो 
थाके घर ने रोशन कर जाजो 
लाडू  बर्फी थे खाजो 
ऊँचो वेजो थारो काम 

दिवाली रा राम - राम|

दीपावली

बजे पटाखे
जली फुलझडी
काली रात पर भी
चढ गयी चमक
दीप जलाये 
थाल सजाये 
घर आँगन मे
फैल गया
खुशियो का रंग 
तन दमका 
मन चमका 
नैनो मे दौडी तरंग 
नये नाचे 
पुराने गाये 
फिजा मे भी आज
फैली सुगंध 
बच्चे बुढो को 
दिल से गले लगाये 
मिठाई बाँटे
मिलकर मुस्कुराये

आओ सब मिलकर
दीप जलाये
दीपावली मनाये |



हालात मेरे फैसला मेरा

Analyser/Observer समय और हालत से उबरना: एक ‘री-प्रोग्रामिंग’ गाइड जब जिंदगी में समय और हालात' हमारे खिलाफ होते हैं, तो अक्सर हमें सलाह म...