Observe human life aspects. Life philosopher. A poet. Writer And mathematics lover. जिन्दगी , मेरी जान और तुम से बढकर कोई हसरत नही मेरी| आप का आपसे सँवाद हे जिन्दगी | बात दिल की आँखो से बया कर , लफ्जो से शिकायत ना कर | जमाना सारा तेरी मोहब्बत मे तेरा अखबार हो गया | Creator -© Ashok Bamniya
Life Lesson
मेरा घोडा (Positive Ego)
जिन्दगी की तेज रपट पर
सरपट दौड़ा मेरा घोडा, मेरा घोडा।
कठिनाइयों की ऊँची चट्टान पर
लंबा कूदा मेरा घोडा , मेरा घोडा।
संकरे, चौडे
उत्तल, अवतल
दर्द नाम का बन विनाशक
हाँफता दौडा, हाँफता दौडा
मेरा घोडा, मेरा घोडा।
लू- सी तपती,
बर्फ सी जमती,
पाक जमीं पर,
लिये पाक इरादे,
खूब इठलाता,
खूब हुंकारता,
बेलगाम मतलबी,
हवा मे उडता,
बादलों मे खेलता,
दौडता जाता, दौडता जाता,
मेरा घोडा, मेरा घोडा।
जिन्दगी की तेज रपट पर
सरपट दौड़ा मेरा घोडा, मेरा घोडा।
©Ashok_Bamniya
गलतियाँ
गलतियाँ
हजार गलतियो से सीखा हूँ,
उलझा हूँ, तभी सुलझा हूँ।
एक सच ऐसा भी
बेखबर जज्बाती
बेबस नहीं
खुश है अब
शायद अब
अपनो ने उसको अपना लिया
बेख्याली मे था लिया फ़ैसला
ज़िन्दगी थी उससे रूठ गयी
साथ मिला क्या तेरा कुछ पल
उसकी तो हँसी ही छुट् गयी
लफ्ज अब शिकायत नहीं करते
डरते है शर्मिंदा है
क्या सामना करे गैरो का
अपने ही कातिल जिन्दा है
रूह तक जहर उतर चुका
सांसे भी रक्त से सनी हुई
आबाद सियासत पहले थी
अब अपनी ही लकड़ी जली हुई
दिन रूठे
मनाने का समय नहीं
अपनो को जताने का समय नहीं
बेखबर जज्बाती
अब मुस्कुराने का समय नहीं।
©Ashok_Bamniya
किरदार
वक़्त आने दो ये भी बदलेगी।
कोई हलचल नही दिख रही
भुचाल आने दो
ये भी धँसेगी ।
जो बाँध रखी है
दिमाग मे ।
खोल दो
कि ये फिर ना खुलेगी ।
अब बता भी दो ।
फिर करोगे किससे
रहनुमा तो अब रहे नही ।
जो लोगो मे ।
तुम्हारे बहुत करीब का
तालाब तुम्हे दिखाई नही देता ।
अब दीवारे तालाब की
कमजोर
बहुत कमजोर
हो गयी है ।
संभाल लो इसको
कि फिर ये तुमसे ना संभलेगी ।
वक़्त आने दो ये भी बदलेगी।
ख्याल
तुम मुझसे नही आइने से पूछो अपनी खुबसुरती के बारे मे, मेरा तो बस यही ख्याल है कि तुम्हे देखने के बाद मेरा ओर कोई ख्याल ना रहा।
ईमान
डोला डोला डोला
ईमान डोला
आज फिर एक सडक का लडका
टावर पर चढ कर बोला
डोला डोला डोला
ईमान डोला
इसका उसका
किसका किसका
ईमान डोला
वादे सारे मर गये
लुटी लंका अपने घर गये
बिन पानी ही तर गये
डोला डोला
ईमान डोला
खुद बन बैठा मगर
मछली हमको बना दिया
तालाब था सारा भरा
अकेला सब पचा दिया
डोला डोला
ईमान डोला
अब फिर कोई नया देवता बन आयेगा
हमको मीठी चाय पिलायेगा
हमारे ही घर खाना वो खायेगा
हमसे अपने बर्तन साफ करवायेगा
अगर अब भी उसको ना समझे तो
सारा का सारा घर वो खा जायेगा
डोला डोला
ईमान डोला
इसका उसका
किसका किसका
ईमान डोला
देखो उसको
अब तो कुछ सीख लो
ऐसा ना करो
कि अपनी आंखे भींच लो
लालच लालच का
अब नाम ना हो
शहर अब अपने कर्मो से ओर
बदनाम ना हो
पहले खुद को
तो मे शुद्ध करू
ज्यादा नही पर
थोडा सा तो प्रबुद्ध करु
डोला डोला
ईमान डोला
@Ashok Bamniya
याद
कब तलक तुम मुझे याद करोगे -2
रोओगे हजार बार याद मे मेरी
क्या उसके बाद भी मुझे याद करोगे
कब तलक तुम मुझे याद करोगे|
किताबे मेरी मेज पर जो थी पडी
चादर मेरी जिसपर सल्वटे थी सजी
क्या उनसे लिपटकर
याद मुझे बार-2 करोगे
कब तलक तुम मुझे याद करोगे |
फूल जो आँगन मे खिला
खडा-2 मुरझा गया
पानी मिला नही
माटी मे समा गया
मन के द्वार खोले कि
भेंट उनसे हो गयी
खिडकी से तेज किरण
आँखो पर पड रही
तेज इतना हुआ की
अँधेरा अब दिख रहा
नजर जहाँ तक गयी देखा
यहाँ हर कोई बिक रहा |-2
आखरी बात
गम नही मुझे इस बात का भी कि मै तुझे खो दूँगा |
इससे ज्यादा ओर क्या होगा ,मै थोडा ओर रो दूँगा |
© Ashok Bamniya
आशकी
छलावा प्यार का
सब ठीक तो है ना
तनाव
यकीन
#HNY नया साल
नौकरी
धदक रहे अँगारे दिल मे
मोहब्ब्त मे तेरी
ये हाल तो मेरा ना होना था |
जब पहली बार देखा था तुझे
चमकीले परिधानो मे लिपटी
तु मुझे मेरे ख्वाबो कि परी सी नजर आयी |
तुझे देख सोच जो मेरी
अब तलक ठहरी थी
तेरी ओर से बहती हवा का
सम्पर्क पा तेरी ओर ही चल पडी |
तुम्हारे उस आकर्षक अहसास ने
हजारो सपने मेरी आँखो मे पाल लिये |
मै तुम्हारी धुन मे खोकर बेसुध सा हो गया |
मैने कि जो तुमसे मोहब्ब्त
पूरी सिद्दत से निभायी भी |
तुमसे मिलने को
तुम्हारे साथ जीवन बसर करने को
हर तरकिब अपनायी भी |
पता नही मुझे
फिर कहा कमी रह गयी |
अपना सब कुछ तो मै लुटा बैठा
फिर भी तुमसे दूरी है |
ऐसी भी क्या तुम्हारी मजबूरी है |
चाहत हो तुम मेरी
मेरी ओर चली आओ
समेट लेना चाहता हू तुम्हे बाँहो मे अपनी
तुम मुझे अपनी ओर तो बुलाओ |
मै कब का मर चुका
हे राम
विरक्ति
नासमझ
सत्य ही मै जानता
बाकी कोई कुछ भी बोले
सब को गलत ही मानता |
अपनी जीत से मै
हर किसी पर हावी था
सच्चे लोगो का बयान भी
मुझ पर अप्रभावी था |
बोली मे अपनी
धौंस मै रखता था
आँखो मै अपनी
रोस मै रखता था |
सकल काम मेरे
कोई ओर ही बनाता था
बात खुद पर आये तो
आक्रोश मै रखता था |
किसी ओर का दिया
खा रहा था
दाँतो तले ऊँगुली
दबा रहा था |
#नासमझ खुद के
गीत गा रहा था |
#नासमझ खुद ही पर
मुस्कुरा रहा था |
#नासमझ अकेला ही
चला जा रहा था |
©Ashok Bamniya
सेठजी-एक मीठा ठग
कुछ पुरानी बाते
ये कैसा भाईचारा

समझ
बदलाव
#पुकार_दिल_की
दिवाली रा राम - राम
❤
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