आंखो मे भी कुछ आस रहती
नये सपने मै भी संजोता
बोली मे भी मिठास रहती
बालपने की हद तक जाता
जीवन मे भी साँस रहती
काश की उम्मीद आबाद रहती |
कलम उठाते ही भर आयी आंखे
घडा भर पीता फिर भी प्यास रहती |
नाकाबिलो को काबिल
हमने बनाया
ऊंचा उठाकर कुर्सी पर बिठाया
किस्मत बदलने की
इनसे आस लगाई
हर बार की तरह
उम्मीदे इस बार भी खाली हाथ आयी |
काश की उम्मीद आबाद रहती |
©Ashok Bamniya