बदलाव

ये लाल कैसे हो गया 
गुलाल तो डाला नही 
गुलाल कैसे हो गया 

आहट कोई हुई नही 
तुम दर से मेरे कब गये 
प्यार तो बढा नही 
मुस्किले हुई खडी
मुस्किले हुई खडी |

माना दिल मे तेरे 
मोह्ब्बत का आगाज ना था 
मैने भी तुमसे कभी 
माँगा ताज ना था |

किले खुशहाली के 
हवाओ से ढह गये 
आयी जो बरसात तो 
पहाड भी बह गये 
पहाड भी बह गये |

सूरते जनाब से 
हाल हमको दिख गया 
आइने सा साफ रंग 
लाल अब से हो गया |

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जिसको जाना है वो बेशक जाये

Analyser/Observer जितनी गुज़रनी थी, गुज़र गई सुकून और सब्र के साथ, आधी से ज़्यादा उम्र तय कर ली है अपने दम पर। अब न किसी को मनाने की चाह बची है...