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समझ

दिन धुआ हो गये 
राते भी काली है 
उम्मीदे मेरे घर को चली आयी 
पर मेरी जेब तो खाली है |

माँगकर सब तरफ देख लिया 
सबकी आंखे एक सवाली है 
क्या नही था तेरे पास 
जो तेरी जेब आज खाली है |

समर्थन सुख मे सब गवाया 
खुद ही लिखा 
खुद ही मिटाया |

बहकावे ने आज से बेहतर 
कल को बताया
वो हुए मालामाल 
मै खाली हाथ घर को आया |

बात अब करता हु 
जब गले तक आयी हे 
बहकावे ने अपनी लंका डुबायी है |

पर्दे पर जो दिख रहा 
तुम उसे ना मानना 
जो अन्दर से सच्चा हो 
उसे तुम जानना |

©Ashok Bamniya

बात दिल की

सच जो आप दिल मे दबाये बैठे हो
सच जो आप लोगो से छुपाये बैठे हो
सच जो आपका झगडा है
उसी ने तो आज आपका गिरेबान पकडा है
क्या लगा था आपको
अँधेरे मे कोई आपको देख ना पायेगा
ज़रा-सा आसमान मे चाँद क्या निकला
पता नही था आपको
आपका राज ही खुल जायेगा
आप जो देखकर हमे मुस्कुरा बैठे हो
जेब मे आपके
हमारे ही पैसे दबा बैठे हो
काम तो फिर भी नही करना आपको
पर ये कोनसा नाटक है
जो आप रचा बैठे हो |
©Ashok Bamniya


हालात मेरे फैसला मेरा

Analyser/Observer समय और हालत से उबरना: एक ‘री-प्रोग्रामिंग’ गाइड जब जिंदगी में समय और हालात' हमारे खिलाफ होते हैं, तो अक्सर हमें सलाह म...