दिन धुआ हो गये
राते भी काली है
उम्मीदे मेरे घर को चली आयी
पर मेरी जेब तो खाली है |
माँगकर सब तरफ देख लिया
सबकी आंखे एक सवाली है
क्या नही था तेरे पास
जो तेरी जेब आज खाली है |
समर्थन सुख मे सब गवाया
खुद ही लिखा
खुद ही मिटाया |
बहकावे ने आज से बेहतर
कल को बताया
वो हुए मालामाल
मै खाली हाथ घर को आया |
बात अब करता हु
जब गले तक आयी हे
बहकावे ने अपनी लंका डुबायी है |
पर्दे पर जो दिख रहा
तुम उसे ना मानना
जो अन्दर से सच्चा हो
उसे तुम जानना |
©Ashok Bamniya
