(Shant Sarovar - Quiet Pond)
शांत सरोवर की गहराइयों में,
एक अज्ञात सी कहानी है।
ठहरी हुई हैं लहरें सारी,
जैसे समय की रुक गई रवानी
दूर खड़ा मैं देख रहा,
यह नीरव और अटल दृश्य
पेड़ों की छाया, आसमान का अक्स,
सब कुछ कितना पवित्र और अदृश्य।
कोई शोर नहीं, कोई हड़बड़ी नहीं,
बस धीमा सा हवा का आना जाना।
मन कहता है, इस शांति को थाम ,
खुद के अंदर भी एक सरोवर बनाना।
जीवन की दौड़ भाग, ये भागमभाग कैसी?
जब सुकून एक पल में मिल सकता,
तो ये अफरा तफरी कैसी,
बस पलकें झुकाकर, साँसों को सुनकर,
हर प्रश्न का उत्तर खुल सकता है।
शुद्ध तन और पवित्र मन से,
मनचाहा वरदान मिल सकता है,
तभी एक लहर उठी धीरे से,
और शांत हुआ वो जल फिर से।
सिखा गई वो मुझको यह बात,
हर उथल-पुथल के बाद आता है विश्राम।

