जिसको जाना है वो बेशक जाये

Analyser/Observer

जितनी गुज़रनी थी, गुज़र गई सुकून और सब्र के साथ,
आधी से ज़्यादा उम्र तय कर ली है अपने दम पर।
अब न किसी को मनाने की चाह बची है,
न ही किसी शिकायत का जवाब देने का हुनर।
जिसको ठहरना है, वो दिल से ठहरे,
जिसको जाना है, वो बेशक रास्ता नापे।
जबरन बाँधे गए रिश्ते सिर्फ बोझ बनते हैं,
अब हम खुद को ऐसी बंदिशों से नहीं बाँधते।
बची हुई ज़िंदगी भी कट ही जाएगी सादगी से,
अपनी ही धुन में, अपनी ही शर्तों पर।
अब न किसी के आने की बेपनाह ख़ुशी है,
न किसी के जाने का मलाल बाकी है।

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जिसको जाना है वो बेशक जाये

Analyser/Observer जितनी गुज़रनी थी, गुज़र गई सुकून और सब्र के साथ, आधी से ज़्यादा उम्र तय कर ली है अपने दम पर। अब न किसी को मनाने की चाह बची है...