अंजाम

गर्दिशे मोहब्बत मुझे किस मुकाम पर लायी है 
आँसू मेरे छलक उठे 
और 
उनके होंठो पर हँसी उठ आयी है | 

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जिसको जाना है वो बेशक जाये

Analyser/Observer जितनी गुज़रनी थी, गुज़र गई सुकून और सब्र के साथ, आधी से ज़्यादा उम्र तय कर ली है अपने दम पर। अब न किसी को मनाने की चाह बची है...