तुम भूल गये

कहो तो जज़्बात दिल के
रख दू तुम्हारे सिरहाने पे
चीनी घोल रखी हे इनमे
तुम्हे सपने मीठे आयेन्गे

तुम्हे लेकर
तुम्हारे बारे मे 
तुम्हारे साथ 
कही दरिया पार किये
घने बादलो की सैर की
कडकती बिजलियो पर नाचे

कहो तो इन्हे तकिया
बना दू
तुम्हे अहसास मेरा करायेन्गे

याद हे ना तुम्हे
जब बीते कुछ सालो मे
सावन का पहला सोमवार आया था
बादल भी थे नभ मे
और रिम्झिम बरखा ने हमे भीगोया था

तुम्हारे चेहरे से
कुछ शरबती बुन्दो को
मैने हटाया था 
तुम्हारी आंखो मे 
गहरा प्यार पाया था

कहो तो सब बाते दिल की
सिरहाने तुम्हारे रख दू 
तुम्हे मिठास तुम्हारी दे जायेगी |

4 comments:

  1. Waah...bahut sundar rachna...👌👌👌

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  2. बहुत ख़ूब ...
    ख़्वाबों की उड़ान ..।

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    1. धन्यवाद दिगम्बर जी

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जिसको जाना है वो बेशक जाये

Analyser/Observer जितनी गुज़रनी थी, गुज़र गई सुकून और सब्र के साथ, आधी से ज़्यादा उम्र तय कर ली है अपने दम पर। अब न किसी को मनाने की चाह बची है...