सावन को आने दो

सावन को आने दो
बादल घिर घिर जाने दो
आसमान मे गरज उठो
तडीत को चम-चमाने दो
भीगने दो वसुन्धरा को
नदी नाल भर जाने दो
सावन को आने दो
बादल घिर घिर जाने दो
भीगेगी जब भाग्य भूमि
खेत यू लहल्हा जायेन्गे
वर्क्ष नव खडे हो जायेन्गे
कालिमा भी कुछ घट सी जायेगी
देखो जब दूर को
खुशियो की सौगात घर तुम्हारे आयेगी
जब इतना सब कुछ हो रहा
तो फिर
सावन को आने दो
बदल घिर घिर जाने दो |


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